Kavita Dunia (Original)

चुनाव कविता

चुनाव कविता – आखिर संपन्न हुए चुनाव | व्यंग्य

लोकतंत्र का महापर्व,
दुनिया जिस पर करती गर्व
जनता चाहती सुखद बदलाव
आखिर संपन्न हुए चुनाव…
5 साल का जनादेश,
जीवन भर फिर ऐश ही ऐश
नेता ओढ़ें संतों का वेष,
यद्यपि संत भी अब कहां शेष

मजदूर पर कविता

सुरंग में फंसे मजदूरों की व्यथा – मजदूर पर कविता

अब तो निकालिए सुरंग से मुझको,
मुझे अपने घर जाना है
किया था जो वादा परिवार से,
वह वादा निभाना है
निभाना है फर्ज बेटे का,
कर्ज पिता का मुझे चुकाना है

गांधी जयंती पर कविता

गांधी जयंती पर कविता – गांधी नेता नहीं सिर्फ महात्मा होते

भारत की है जिससे पहचान,
सारी दुनिया में जिनका मान
समाधि जिनकी तीर्थ समान,
हर नेता के प्रथम भगवान
गांधी नाम का जप कर कर,
श्री गणेश होता चुनाव अभियान

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