Dhumil Ki Kavita

Dhumil Ki Kavita | सच्ची बात – धूमिल की कविता

बाड़ियाँ फटे हुए बाँसों पर फहरा रही हैं और इतिहास के पन्नों पर धर्म के लिए मरे हुए लोगों के नाम बात सिर्फ़ इतनी है स्नानाघाट पर जाता हुआ रास्ता देह की मण्डी से होकर गुज़रता है
कवि भूषण शिवाजी कविता

कवि भूषण शिवाजी कविता – इन्द्र जिमि जंभ पर (भावार्थ के साथ)

साजि चतुरंग वीर रंग में तुरंग चढ़ि, सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं  ‘भूषण’ भनत नाद विहद नगारन के, नदी नद मद गैबरन के रलत है ।।
हम कौन थे क्या हो गये हैं और क्या होंगे अभी

हम कौन थे क्या हो गये हैं और क्या होंगे अभी | मैथिलीशरण गुप्त

म कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी भू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहां फैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहां
भ्रम सुभद्रा कुमारी चौहान

भ्रम – सुभद्रा कुमारी चौहान | Subhadra Kumari Chauhan

देवता थे वे, हुए दर्शन, अलौकिक रूप था देवता थे, मधुर सम्मोहन स्वरूप अनूप था देवता थे, देखते ही बन गई थी भक्त मैं हो गई उस रूपलीला पर अटल आसक्त मैं
मगर यामिनी बीच में ढल रही है

मगर यामिनी बीच में ढल रही है – हरिवंशराय बच्चन

न तुम सो रही हो, न मैं सो रहा हूँ, मगर यामिनी बीच में ढल रही है। दिखाई पड़े पूर्व में जो सितारे, वही आ गए ठीक ऊपर हमारे, क्षितिज पश्चिमी है बुलाता उन्हें अब, न रोके रुकेंगे हमारे-तुम्हारे