राम पर पंक्तियां

राम पर पंक्तियां – Ram Par Kavita

रमा है सबमें राम, वही सलोना श्याम। जितने अधिक रहें अच्छा है अपने छोटे छन्द, अतुलित जो है उधर अलौकिक उसका वह आनन्द लूट लो, न लो विराम; रमा है सबमें राम।
वह खून कहो किस मतलब का

वह खून कहो किस मतलब का – गोपालप्रसाद व्यास

वह खून कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं। वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं। वह खून कहो किस मतलब का जिसमें जीवन, न रवानी है!
थककर बैठ गये क्या भाई

थककर बैठ गये क्या भाई… मंजिल दूर नहीं है – रामधारी सिंह दिनकर

वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है; थककर बैठ गये क्या भाई! मंजिल दूर नहीं है। चिनगारी बन गई लहू की बूँद गिरी जो पग से; चमक रहे, पीछे मुड़ देखो, चरण - चिह्न जगमग - से।
रामधारी सिंह दिनकर की वीर रस की कविताएं

रामधारी सिंह दिनकर की वीर रस की कविताएं

रामधारी सिंह दिनकर का योगदान हिन्दी साहित्य में अद्वितीय है, और उनकी कविताएं आज भी याद की जाती हैं, जो भारतीय समाज के लिए एक आदर्श और प्रेरणास्रोत की भूमिका निभाती हैं।
सुंदर कविता हिंदी में

सुंदर कविता हिंदी में – ऐसे मैं मन बहलाता हूँ – हरिवंशराय बच्चन

सोचा करता बैठ अकेले, गत जीवन के सुख-दुख झेले, दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!
चुनाव कविता

चुनाव कविता – आखिर संपन्न हुए चुनाव | व्यंग्य

लोकतंत्र का महापर्व, दुनिया जिस पर करती गर्व जनता चाहती सुखद बदलाव आखिर संपन्न हुए चुनाव... 5 साल का जनादेश, जीवन भर फिर ऐश ही ऐश नेता ओढ़ें संतों का वेष, यद्यपि संत भी अब कहां शेष