मजदूर पर कविता

सुरंग में फंसे मजदूरों की व्यथा – मजदूर पर कविता

अब तो निकालिए सुरंग से मुझको, मुझे अपने घर जाना है किया था जो वादा परिवार से, वह वादा निभाना है निभाना है फर्ज बेटे का, कर्ज पिता का मुझे चुकाना है
हे भारत के राम जगो

हे भारत के राम जगो – श्याम सुंदर रावत | आशुतोष राणा

हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हें जगाने आया हूं, सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूं सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में, आज बता दो कितना पानी, है भारत के वीरो में
कविता का हठ

कविता का हठ – हुंकार – रामधारी सिंह दिनकर

"बिखरी लट, आँसू छलके, यह सुस्मित मुख क्यों दीन हुआ? कविते! कह, क्यों सुषमाओं का विश्व आज श्री-हीन हुआ? संध्या उतर पड़ी उपवन में? दिन-आलोक मलीन हुआ? किस छाया में छिपी विभा? श्रृंगार किधर उड्डीन हुआ?
गांधी जयंती पर कविता

गांधी जयंती पर कविता – गांधी नेता नहीं सिर्फ महात्मा होते

भारत की है जिससे पहचान, सारी दुनिया में जिनका मान समाधि जिनकी तीर्थ समान, हर नेता के प्रथम भगवान गांधी नाम का जप कर कर, श्री गणेश होता चुनाव अभियान
चन्द्रयान-3 पर कविता

चन्द्रयान-3 पर कविता – चीन, अमेरिका भी थे परेशान पर पहुंचा आखिर हिंदुस्तान

बधाई वैज्ञानिकों को, बधाई इसरो को, बहुत-बहुत बधाई अध्यक्ष सोमनाथ बधाई पूर्व अध्यक्ष के. सिवन को, सफलता में उनका भी बड़ा हाथ सारी टीम हकदार बधाई की,
माँ पर कविता हरिवंश राय बच्चन

Motivational Poem in Hindi by Harivansh Rai Bachchan

निद्रा की मादक मदिरा पी, सुख स्वप्नों में बहलाकर जी, रात्रि-गोद में जग सोया है, पलक नहीं मेरी लग पाई! दीप अभी जलने दे, भाई! आज पड़ा हूँ मैं बनकर शव, जीवन में जड़ता का अनुभव, किसी प्रतीक्षा की स्मृति से ये पागल आँखें हैं पथराई!