समान नागरिक सहिंता पर कविता | Uniform Civil Code in Hindi
भारत में लागू होना चाहिए समान नागरिक सहिंता,
विभाजितता के मायाजाल से मुक्त हो जाए हमारा देश।
हम सबका रवैया हो समान, न कोई भेदभाव का खेल,
भारत में लागू होना चाहिए समान नागरिक सहिंता,
विभाजितता के मायाजाल से मुक्त हो जाए हमारा देश।
हम सबका रवैया हो समान, न कोई भेदभाव का खेल,
Sushant Singh Rajput Poem सुशांत सिंह राजपूत, वो अद्वितीय थे यारों, उनकी आंखों में चमक, उनके अंदाज में कुछ बात
जीवन एक कविता है, सुंदर और अद्वितीय,
स्वर्ग और नरक का खेल है, अनंत और अनन्ती।
यह एक सफर है, मजबूती और कमज़ोरी का,
आशा की रौशनी और विपत्तियों का मंज़र है।
घुटनो से रेंगते रेंगते
कब पैरो पर खड़ा हुआ
तेरी ममता की छाव में
ना जाने कब बड़ा हुआ
वतन की मिट्टी में जन्मा हूँ,
वतन के लिए जीना चाहता हूँ।
मेरा दिल है तिरंगे की भूमि,
वतन के लिए हर कठिनाई सहता हूँ।
देखो हमारी ये घड़ी, क्या कहानी कह रही है,
अपनी परिधि में समय की धारा बह रही है।
ये रंगीन परिंदों की तरह दौड़ती है,
मिनटों की पंख उड़ाती है,बीता वक्त दिखाती है।
टीवी की दुनिया, रंगीन और चमकीली,
घरों का सबसे प्यारा मनोहारी खिलौना।
चाहे सपनों का सफ़र हो या समाचार की बौछार,
टीवी जो बदलती है हमारे जीवन की कहानी का सार
समाचार का खज़ाना है यह अख़बार,
जो जग के रंग-मंच की कहानी सुनाए।
हर सुबह उठकर जब ये हाथों में आए,
दिल में उमंगों की बौछार चमक जाए।
चाय की ये एक कहानी है,
जो भावों को जगाती है।
एक प्याली गर्म सी,
जीवन के हर पल को छू जाती है।
जागो जगाने आया हूँ,
योग के साथ लय लाया हूँ।
सूर्योदय के संग जगमगा रहा हूँ,
आत्मा को जगाने आया हूँ।