Tag: सविता पाटिल

संघर्ष और सफलता कविता

संघर्ष और सफलता कविता – मंजिलों की क्या हैसीयत

कश्तियां कहाँ मना करती है तूफानों से टकराने को वो मांझी ही डर जाता है  अपने आप को आजमाने को
बदलाव पर कविता

बदलाव पर कविता – मैं क्यों खुद को बदलूँ

मैं, मैं हूँ और सदा मैं ही रहूँ !मैं क्यों खुद को बदलूँ ? मेरी सोच मेरी है जानता हूँ, ये खरी है !
ये देश बनता है कविता

ये देश बनता है – ये देश नही बनता केवल खेत-खलिहानों से

ये देश नही बनता केवल खेत-खलिहानों से पहाड़ो से या मैदानों से पठारों या रेगिस्तानों से ये देश बनता है.... यहाँ बसते इंसानों से।
Chhoti si Kavita

Chhoti si Kavita: हर समंदर यहाँ सैलाब लिए खड़ा है

हर समंदर यहाँ सैलाब लिए खड़ा है मौन-सी लहरों में कुछ रहस्य जड़ा है आसपास घूमते चेहरों में एक किस्सा, अपनी एक दास्तां है सभी एक सफर है है कुछ न कुछ जो सभी ने सहा है हर समंदर यहाँ सैलाब लिए खड़ा है।
परिवर्तन पर कविता

परिवर्तन पर कविता: बदलाव करो निरंतर करो

बदलाव करो, निरंतर करो पर उसमें कुछ बेहतर करोबदलाव हो जो जीवन सरल करे जड़ता को विरल करेबदलाव अज्ञानता से ज्ञान का मूढ़ता से विद्यावान का