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इंकार कर दिया - रामावतार त्यागी की कविता

Ram Avtar Tyagi Poems Hindi

आँचल बुनते रह जाओगे,
ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है,
आदमी का आकाश,
ज़िंदगी एक रस, तन बचाने चले थे

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