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शूद्र - मैथिलीशरण गुप्त

शूद्र – मैथिलीशरण गुप्त | शूद्रो! उठो, तुम भी कि भारत-भूमि डूबी

शूद्रो! उठो, तुम भी कि भारत-भूमि डूबी जा रही, है योगियों को भी अगम जो व्रत तुम्हारा है वही। जो मातृ-सेवक हो वही सुत श्रेष्ठ जाता है गिना,