Tag: हरिवंश राय बच्चन

मगर यामिनी बीच में ढल रही है

मगर यामिनी बीच में ढल रही है – हरिवंशराय बच्चन

न तुम सो रही हो, न मैं सो रहा हूँ, मगर यामिनी बीच में ढल रही है। दिखाई पड़े पूर्व में जो सितारे, वही आ गए ठीक ऊपर हमारे, क्षितिज पश्चिमी है बुलाता उन्हें अब, न रोके रुकेंगे हमारे-तुम्हारे
सुंदर कविता हिंदी में

सुंदर कविता हिंदी में – ऐसे मैं मन बहलाता हूँ – हरिवंशराय बच्चन

सोचा करता बैठ अकेले, गत जीवन के सुख-दुख झेले, दंशनकारी सुधियों से मैं उर के छाले सहलाता हूँ! ऐसे मैं मन बहलाता हूँ!
माँ पर कविता हरिवंश राय बच्चन

Motivational Poem in Hindi by Harivansh Rai Bachchan

निद्रा की मादक मदिरा पी, सुख स्वप्नों में बहलाकर जी, रात्रि-गोद में जग सोया है, पलक नहीं मेरी लग पाई! दीप अभी जलने दे, भाई! आज पड़ा हूँ मैं बनकर शव, जीवन में जड़ता का अनुभव, किसी प्रतीक्षा की स्मृति से ये पागल आँखें हैं पथराई!
Jo beet gayi so baat gayi kavita

Jo beet gayi so baat gayi kavita – Harivansh rai bachchan

जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले
Harivansh rai bachchan ki rachnaye - Patriotic kavitayen in hindi

Harivansh rai bachchan ki rachnaye – Patriotic kavitayen in hindi

सुमति स्वदेश छोड़कर चली गई, ब्रिटेन-कूटनीति से छलि गई, अमीत, मीत; मीत, शत्रु-सा लगा, अखंड देश खंड-खंड हो गया।
Harivansh Rai Bachchan Poems

Harivansh Rai Bachchan Poems – हरिवंशराय बच्चन की कविताएँ

जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले
माँ पर कविता हरिवंश राय बच्चन

माँ पर कविता हरिवंश राय बच्चन | Mother Poem in Hindi

आज मेरा फिर से मुस्कुराने का मन किया, माँ की ऊँगली पकड़कर घूमने जाने का मन किया। उंगलियाँ पकड़कर माँ ने मेरी मुझे चलना सिखाया है, खुद गीले में सोकर माँ ने मुझे सूखे बिस्तर पे सुलाया है।
बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर कविता

बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर कविता – हरिवंश राय बच्चन

बैठ जाता हूँ मिट्टी पे अक्सर,  क्यूंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है। मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीका, चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना।